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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठशहद के फायदे
खनिजों, à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट, अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और à¤à¤‚जाइमों में समृदà¥à¤§, शहद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में बेहतर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बढ़ावा देने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है। हालांकि, इस मीठे शहद का अधिकतम लाठउठाने के लिà¤, शहद को चà¥à¤¨à¤¨à¤¾ सबसे अचà¥à¤›à¤¾ होता है जिसे संसाधित नहीं किया जाता है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिaठशहद के संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ लाà¤à¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
ठंड, फà¥à¤²à¥‚ और खांसी से तà¥à¤°à¤‚त राहत देता है
इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ाता है
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में नींद का संकेत देता है
नियमित मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— का समरà¥à¤¥à¤¨ करता है
पाचन तंतà¥à¤° की सेहत का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखता है
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में संजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विकास को बढ़ावा देता है
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की खांसी के लिठशहद (बेबी कफ के लिठहनी)
शहद में à¤à¤• पदारà¥à¤¥ होता है जो डेकà¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤¥à¥‹à¤°à¥à¤«à¤¨ के रूप में कहा जाने वाला à¤à¤• कफ सपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚ट के रूप में कारà¥à¤¯ करता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सरà¥à¤¦à¥€, खांसी या बà¥à¤–ार के इलाज के लिठथोड़े से गरà¥à¤® पानी में थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में शà¥à¤¦à¥à¤§ शहद मिलाà¤à¤‚। अचà¥à¤›à¥‡ परिणामों के लिठदिन में दो बार अपने बचà¥à¤šà¥‡ को इसका मिशà¥à¤°à¤£ दें।
जो बचà¥à¤šà¥‡ ऊपरी शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पथ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से पीड़ित हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रात में सोने से पहले à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š शहद दिया जा सकता है ताकि वे खाà¤à¤¸à¥€ कम कर सकें और साथ ही नींद की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सके।
अपने बचà¥à¤šà¥‡ को शहद कैसे दें?
यदि आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ के आहार वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में शहद को शामिल करना चाहते हैं, तो आप अपने पसंदीदा खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में इसे थोड़ा सा शामिल कर सकते हैं। किसी à¤à¥€ तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने के लिठउनके आहार में धीरे-धीरे शहद डालना फायदेमंद होता है। अपने बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में शहद को शामिल करने के लिठनिमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीकों में से कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर सकते हैं:
ओटमील में शहद मिलाà¤à¤‚।
टोसà¥à¤Ÿ पर शहद फैलाà¤à¤‚।
दही में शहद डालें।
à¤à¤• होममेड सà¥à¤®à¥‚दी में शहद मिलाà¤à¤‚।
वेफलà¥à¤¸ या पेनकेकà¥à¤¸ बनाते समय शहद का उपयोग करें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शहद कब दिया जा सकता है?
12 महीने को पार करने के बाद ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शहद दिया जाना चाहिà¤, यानी वे 1 साल से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने पर शहद दें। शहद में à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤²à¤ पà¥à¤°à¤•ार का जीवाणà¥, कà¥à¤²à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤® बोटà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤® होता है जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨ विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ का कारण बन सकता है। हनी बचà¥à¤šà¥‡ के उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ दांतों के लिठà¤à¥€ खराब है, इसलिठ1 वरà¥à¤· से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शहद का सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठशहद के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸
यदि आपका बचà¥à¤šà¤¾ 1 वरà¥à¤· का नहीं है, तो शहद काफी कà¥à¤› दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पैदा कर सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ उनके जठरांतà¥à¤° संबंधी मारà¥à¤— में जीवाणॠके बीजाणà¥à¤“ं को मारने के लिठकाफी मजबूत होती है।
12 महीने से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‡ को शहद देने का पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• जोखिम शिशॠबोटà¥à¤²à¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® है।
6 महीने से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सबसे अधिक खतरा होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके शरीर शहद के सेवन पर हानिकारक नà¥à¤¯à¥‚रोटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं।
बोटà¥à¤²à¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में सांस लेने की समसà¥à¤¯à¤¾ और मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बन सकती है।
शिशॠबोटà¥à¤²à¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के सबसे आम लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में कबà¥à¤œ, सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€ और कमजोरी शामिल हैं। अनà¥à¤¯ गंà¤à¥€à¤° लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सांस लेने में तकलीफ, लकवा, दौरे और मांसपेशियों में à¤à¤‚ठन शामिल हैं।
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